अन्ना, क्या यह गाँधी की भाषा है ?

भारत मां की शान मैं ,
बुजुर्ग अन्ना बैठ गए हैं
रामलीला मैंदान मैं !
अन्ना आपसे देश को
,बहुत आशा है !
* * *
मिल रहा समर्थन भी,
अच्छा खासा है !
सर पर गाँधी टोपी पहने ,
हाथ मैं लेकर झंडा ,
जय जयकारे लगा रहे हैं ,
भ्रष्टों के कारनामे बंच रहे हैं ,
भ्रष्टाचार पर नांच रहे हैं ,
क्या खूब
करप्शन उत्सव है !
कहा जा रहा है ,
यह क्रांति है , यह विप्लव है !
गली गली से
रामलीला तक
“मैं अन्ना हूँ”
का अजब तमाशा है !
पर लेनदेन ही भ्रष्टाचार है
लोकपाल मैं करप्शन की
इतनी सीमित क्यों परिभाषा है ?
अन्ना आपसे देश को बहुत आशा है !
* * *
इस आन्दोलन से
वर्षों बाद लोग फिर जगे हैं !
गाँधी के हत्यारे सबसे आगे हैं !
सिब्बल को वे ‘कुत्ता’ कहते ,
दिग्गी को वे ‘चूहा’ मानते !
उनके लिए-
सोनिया भ्रष्टाचार की मम्मी है !
राजनीती को कहते, बहुत निकम्मी हैं!
वे सर्कार को नंगा करेंगे ,
नहीं तो जमकर पंगा करेंगे !
विरोधियों को भेजेंगे पागलखाने
फिर क्या होगा , रामजाने !
किरण जी ने कह दिया है –
अन्ना ही भारत है ,
भारत है वो अन्ना है !
कुछ भी कहते ,कुछ भी बकते
न हिन् रुकते , न हिन् थकते !
मचा रखा एक शोर चरों और है ,
जो अन्ना संग नहीं वे सब चोर हैं !
बोलो गान्धीबादियों ,
क्या यह भाषा गाँधी की भाषा है ?
उत्तर दो अन्ना , देश को जिज्ञासा है !
आना आपसे देश को बहत आशा है !
* * *
अब ‘अ’ से ‘अन्ना’ है
और है ‘अ’ से ‘अराजकता’
‘अ’ से आवारा भीड़ भी है
और हैं उसके खतरे भी,
आज अगर ये जीत जायेंगे
कल फिर से ये दिल्ली आयेंगे
दुगुने जोर से चिल्लायेंगे
आरक्षण को ख़त्म कराएँगे
संविधान को नष्ट कराएँगे
लोकतंत्र की जगह
तानाशाही राज लायेंगे
फिर वो होगा, जिसकी हमको
सपने भी नहीं आशा है !
जन मानस मैं बढ़ने
लगी हताशा है!
आना आपसे देश को बहत आशा है ! ,
* * *
मगर निराश न हों
हताश न हों
उठो , देशवाशियो ,
गरीव ,गुरवो ,
मजदूरों , किशानों ,
दलितों आदिवाशियों
जवाब दो
इस अराजक आवारा भीड़ को
कि कोई हमारे लोकतंत्र को
‘बंधक’ नहीं बना सकता
और अपनी शर्तों पर डेमोक्रेसी को नहीं चला सकता !
* * *
हमें अपनी आज़ादी
अपना संविधान
अपना लोकतंत्र
और अपना मुल्क
बेहद प्यारा है
जिसे एक ‘हजारे’ ने नहीं ‘हजारों’ ने
लाखों और करोड़ों ने
अपने खून , पसीने से संवारा है !
यह प्राण है हमारा –
हम ‘जनता’ के नाम पर
असंवैधानिक आचरण चलने नहीं देंगे
‘जन लोकपाल’ की ‘आस्तीन’ में
‘तानाशाही’ के सांप को पलने नहीं देंगे !
* * *
हाँ हम उठ खड़े होंगे
चीखेंगे और चिल्लायेंगे
कि हमें हमारा लोकतंत्र चाहिए
हमें हमारा संविधान चाहिए
हमें हमारी आज़ादी चाहिए
कि हम निर्भीक होकर खुली हवा में साँस लेना चाहते हैं ,
हमें मज़वूर मत करो ,
हमें पानी में चाँद मत दिखाओ
जन लोकपाल के नाम पर मत भ्रमाओ
हम जानते हैं
एक कानून नहीं बदल सकता है
देश की तक़दीर
लोकपाल नहीं मिटा सकता है
भ्रष्टाचार
क्योंकि भ्रष्टाचार तो
इन चतुर सयानों के दिमागों में है
इनकी वर्ण व्यवस्था , जाती प्रथा
और पुरातन संहिताओं में है !
हम उस भ्रष्टाचार से सदियों से संतप्त हैं
उसके अत्याचार ,उत्पीडन और अत्याचार से त्रस्त हैं
जिसमें लिप्त हैं सब !
* * *
और अन्ना आप भी ,
कभी नहीं बोले –
छूआछूत पर ,
दलितों पर हो रहे अत्याचारों
के विरुद्ध,
आदिवाशियों के विस्थापन के खिलाफ ,
क्यों चुप रहे
अन्ना आप ?
खैरलांजी पर , सिंगुर , नंदीग्राम ,
पोस्को , जैतपुर ,
क्या क्या गिनाऊँ
क्या यह भी कहूँ
कि आपके ही आदर्श गाँव रालेगन सिद्धि में
दलितों को
क्यों नहीं मिल पाया सामाजिक न्याय
और आपके ही राज्य में
आत्महत्या करने वाले लाखों किशानों को ,
क्यों नहीं बचा पाए ?
तीन साल की एक बच्ची
जो नहीं समझती
कि ‘जन लोकपाल’ क्या है ?
और क्या है भ्रष्टाचार ?
उसका तो अनशन तुड़वाकर
खूब बटोरे गए बाइट्स मीडिया पर
लेकिन क्या
ग्यारह वर्ष से अनशन पर बैठी
पूर्वोत्तर की बेटी
इरोम शर्मीला चानू
आपको अपनी बेटी नहीं लगती
उसका अनशन कोण तुद्वायेगा ,
इन सब पर कब सोचेंगे आप
मराठी मानुस राज ठाकरे
और हजारों बेगुनाहों के
नरसंहार के साक्षी
नरेन्द्र मोदी की प्रशंशा
से फुर्सत मिले ,
तो जरा सोचना
इनके लिए भी ,
क्योंकि अन्ना देश को आपसे बहुत आशा है !
* * *
भंवर मेघवंशी
(डाइमंड इंडिया के संपादक हैं )
bhanwarmeghwanshi@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं

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